Total Quality Management in hindi

TQM एक ऐसी मैनेजमेंट तकनीक या मेथड है जिसमें कि processes की क्वालिटी, प्रोडक्ट की क्वालिटी तथा सभी क्रियाकलापों(activities) को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किये जाते है.

आसान शब्दों में कहें तो “यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मैनेजमेंट तथा संगठन/कंपनी के सभी कर्मचारियों के द्वारा customer को बेहतर सर्विस देने के लिए लगातार प्रयास किये जाते है.”

organisation में उपर से लेकर नीचे तक के कर्मचारियों की भूमिका क्वालिटी प्रोडक्ट उपलब्ध कराने में तथा customer को अच्छी सर्विस देने में होती है तथा TQM किसी एक विशेष प्रोजेक्ट तथा प्रोडक्ट पर आधारित नही होता है बल्कि यह पूरी organisation पर आधारित होता है.

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें errors तथा defects को हटा दिया जाता है तथा customer को बेहतर सुविधा उपलब्ध करायी जाती है.

कभी भी यह याद रखना चाहिए कि कोई भी customer जब किसी कंपनी के प्रोडक्ट से खुश या satisfy होता है तो वह उस प्रोडक्ट तथा कंपनी के बारे में और लोगों को बताता है तो ज्यादा लोग उससे जुड़ते है. इसलिए total quality management बहुत जरुरी है.

इसे William Deming ने 1980 में विकसित किया था तथा इसे हिंदी में “सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबन्धन” कहते है.

TQM  process

इसकी प्रक्रिया 4 भागों में विभाजित होती है:-

1:-PLAN 

2:-DO 

3:-CHECK

 4:-ACT अर्थात PDCA cycle(चक्र).

TQM सबसे पहले customer को ध्यान में रखकर शुरू होता है और कभी खत्म नही होता है क्यूंकि इसके जीवनकाल का commitment ही क्वालिटी को लगातार बेहतर बनाना होता है.

1:-PLAN:- यह PDCA चक्र का पहला स्टेप होता है इसमें परेशानियों का आकलन किया जाता है और इन परेशानियों के आधार पर नये plan बनाये जाते है.

2:-DO:- इस स्टेप में जो plan बनाया गया था उसको implement किया जाता है. और जो भी बदलाव किये जाते है उनको मूल्यांकित करने के लिए documented कर लिया जाता है.

3:-CHECK:- इस स्टेप में पिछले phase से प्राप्त डेटा की जांच की जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि जो plan किया था उसको achieve कर लिया गया है या नही.

4:-ACT:– यह PDCA का आखरी स्टेप है इस स्टेप में organisation के अन्य कर्मचारियों के साथ communicate किया जाता है और उनसे discuss करके नये procedures को implement किया जाता है. तथा इस नये implementation की जानकारी अन्य लोगों को दी जाती है.

यहाँ याद रखने वाली बात यह है कि यह एक लगातार चलने वाला चक्र है act स्टेप के बाद फिर से plan स्टेप आ जाता है.

 

PRINCIPLES of TQM

1:-customer focus:- कंपनी में customer की आवश्यकताओं के अनुसार तथा satisfaction के आधार पर निर्णय लिए जाते है और वैसे भी कोई भी customer तब satisfy होता है जब अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट कम दामों में प्राप्त हो.

“CUSTOMER IS KING”

customer को राजा की तरह treat किया जाता है।

2:- continuous improvement:- TQM की एक और विशेषता सभी activities को और बेहतर करना है और यह लगातार जारी रहता है. प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए नियत तथा निरंतर प्रयास किये जाते है.

3:- employee involvement:- इसमें कर्मचारियों को शामिल किया जाता है क्योंकि कर्मचारियों के द्वारा ही प्रोडक्ट में क्वालिटी को बेहतर किया जा सकता है. क्योंकि अगर कर्मचारियों को empower(सशक्त) बनाया जायेगा तो वे अपनी सर्विस बेहतर ढंग से दे पायेंगे.

“इसमें सभी लोगो को शामिल किया जाता है;’ manager से लेकर चौकीदार तक सभी लोगो को’ क्योंकि सभी लोगो के अपने roles तथा जिम्मेदारियां होती है.”

4:- techniques तथा tools:– कंपनी में तकनीक तथा tools का प्रयोग बहुत ही आवश्यक है; इनसे क्वालिटी को increase किया जा सकता है. ज्यादातर कर्मचारी एक समय में केवल एक ही टूल का प्रयोग करते है परन्तु कभी-कभी tools को combination में प्रयोग करना बहुत फायदेमंद साबित होता है.

5:- decision-making:- कंपनी में जो निर्णय लिए जाये वह तथ्यों तथा डेटा के आधार पर होने चाहिए न कि emotions तथा personal issues के आधार पर.

6:- communication:- किसी भी बिज़नस के सफल होने के लिए कम्युनिकेशन बहुत आवश्यक है. अगर कस्टमरों तथा कर्मचारियों के मध्य ढंग से communication नही हो पा रहा है तो बिज़नस का खाक होगा.

Advantage of TQM 

  • इसका लाभ यह है कि इससे customer संतुष्ट रहता है क्योंकि कंपनी के पास प्रोडक्ट तथा सेवायें बेहतरीन होती है उनमें कोई गलती नहीं होती है. और तब कंपनी को बहुत मुनाफा होता है क्योंकि ग्राहक खुद उस प्रोडक्ट के बारें में अन्य लोगों को भी बताते है.
  • इससे product की defects (कमियों) को कम किया जाता है. क्योंकि tqm का मुख्य कार्य है प्रोडक्ट की quality को बेहतर बनाना, जिससे प्रोडक्ट बहुत ही अच्छा बनता है.
  • इससे यह पता चलता है कि market में किन product की जरुरत है.
  • इससे कंपनी की cost में कमी आती है.

इन पोस्ट को भी पढ़े :-

Capability Maturity Model in Hindi

Importance Of Software Testing in hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top