Spiral Model in hindi

Spiral Model एक प्रकार का combination होता है sequential और prototype मॉडल का. इनका प्रयोग मुख्य रूप से बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है, जिसमें निरंतर growth शामिल होती है। ये विशेष प्रकार की गतिविधियां होती हैं, जिन्हे एक iteration (spiral) में किया जाता है. इनका प्रयोग वहां होता है, जहां आउटपुट बड़े सॉफ़्टवेयर का एक छोटा prototype होता है. जब तक प्रोजेक्ट पूर्ण रूप से पूरा नहीं हो जाता, तब तक सभी Spirals के लिए समान गतिविधियों को दोहराया जाता है।

यदि दूसरी भाषा में समझाया जाये तो, स्पाइरल मॉडल एक risk-driven software development process model होता है. किसी दिए गए प्रोजेक्ट के अद्वितीय जोखिम पैटर्न के आधार पर, स्पाइरल मॉडल टीम का मार्गदर्शन करता है कि उन्हें एक और एक से अधिक प्रोसेस मॉडल के elements चुनना चाहिए जैसे कि: incremental, waterfall, evolutionary prototyping, आदि.

Phases of Spiral Model

1) योजना का चरण (Planning phase) 

  • जिस जिस चीज की भी आवश्यकता होती है, उन सब से जुड़ा अध्ययन और उन्हें एकत्र किया जाता है
  • साथ ही इसमें व्यवहार्यता अध्ययन भी आवश्यक है.
  • आवश्यकताओं को well organized करने के लिए समीक्षा और पूर्वाभ्यास भी जरूरी होती है.
  • जरूरत के सभी दस्तावेज को समझना
  • आवश्यकताओं की अंतिम सूची को बनाना

2) जोखिम विश्लेषण चरण (Risk analysis phase) 

  • सभी जरूरत का अध्ययन किया जाता है और संभावित जोखिमों की पहचान करने के लिए brainstorming session किए जाते हैं
  • एक बार जोखिमों की पहचान हो जाने के बाद, जोखिम शमन रणनीति की योजना बनाई जाती है और उसे अंतिम रूप दिया जाता है, जिसे जोखिम न के बराबर हो.
  • उन दस्तावेज़ को रखा जाता है, जो सभी जोखिमों और इसकी शमन योजनाओं पर प्रकाश डालता है।

3) इंजीनियरिंग चरण (Engineering phase) 

  • इस चरण के दौरान वास्तविक विकास और परीक्षण किया जाता है सॉफ्टवेयर का.
  • कोडिंग पर ध्यान दिया जाता है.
  • test summary रिपोर्ट और defect report जाती है.

4) मूल्यांकन का चरण (Evaluation phase)

  • इस चरण को अंतिम चरण कहा जाता है इसमें ग्राहक सॉफ़्टवेयर का मूल्यांकन करता है और अपनी reaction और approval प्रदान करता है.
  • सुविधाएँ लागू दस्तावेज़.

Uses of Spiral Model in hindi

  • जब प्रोजेक्ट बड़े होते हैं.
  • जब लागत और जोखिम मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो.
  • मध्यम से उच्च जोखिम वाले प्रोजेक्ट्स के लिए.
  • जब यूजर अपनी आवश्यकताओं के बारे में अनिश्चित होते हैं.
  • जब जरूरते जटिल होती हैं.
  • नई उत्पाद लाइन के समय.
  • आर्थिक प्राथमिकताओं में संभावित परिवर्तनों के कारण लम्बे समय के प्रोजेक्ट प्रतिबद्धता नासमझी के लिए.
  • महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी हेतु.
  • जब सॉफ्टवेयर के लगातार जोखिमों के मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।

Advantages of Spiral Model in hindi

  • सॉफ्टवेयर के विकास की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
  • बड़े प्रोजेक्ट या सॉफ्टवेयर को एक सही तरीके से संभाला जा सकता है.
  • जोखिमों का बार बार मूल्यांकन कर के उन्हें कम किया जा सकता है.
  • विकास के सभी चरणों की ओर नियंत्रण रहता है.
  • ज्यादा से ज्यादा सुविधाओं को एक व्यवस्थित तरीके से जोड़ा जाता है।
  • सॉफ्टवेयर का निर्माण जल्दी किया जा सकता है।
  • ग्राहकों की प्रतिक्रिया के लिए जगह है और परिवर्तन तेजी से लागू किए जाते हैं।

 

Disadvantages of Spiral Model in hindi

  • इस मॉडल के जरिये सॉफ्टवेयर का निर्माण महंगा हो सकता है.
  • जोखिम विश्लेषण के लिए अत्यधिक specialized expertise की आवश्यकता पड़ेगी।
  • प्रोजेक्ट की सफलता जोखिम analysis phase पर अत्यधिक निर्भर रहती है।
  • छोटे प्रोजेक्ट के लिए ये अच्छा काम नहीं करता है।
  • spiral limit से बाहर जा सकता है।
  • Documentation बहुत बढ़ जाती है क्यूंकि इसमें बीच में भी कई चरण आ जाते हैं.

जिस तरह से हमने देखा, तो उससे ये conclusion निकल के आया, कि स्पाइरल मॉडल में प्रत्येक स्पाइरल एक लूप के समान होता है और हर लूप अपनी अपनी अलग development process रखता है. process  विषय में हमने आपको ऊपर जानकारी दी है.

ये बड़े प्रोजेक्ट के लिए बहुत effective होता है लेकिन छोटे प्रोजेक्ट के लिए ये महंगा और उतना effective नहीं prove होता है.

इनका उपयोग बड़े प्रोजेक्ट करने के लिए बहुत अच्छा है जहां आप छोटे prototype विकसित और वितरित कर सकते हैं और इसे बड़ा सॉफ्टवेयर बनाने के लिए बढ़ा सकते हैं।

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